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Friday, 27 May 2016

पर वो नहीं आई

"मेरे अनुज अभिषेक गांगुली को समर्पित रचना - "

निमिया तले, छाओं में बैठे,
पुरबइया बहे, मन कुछ कहे,
ना जाने वो कब आएगी,
इंतजार अब लम्बा हो रहा,
पलकें भी थक हार गयी,
पर वो नहीं आई,

पल पल लगे भारी,
आस अब भी बची,
अब तो आ जाओ,
कितने इम्तेहां लोगी हमारी,
कुछ गाने प्यार के,
कुछ वियोग के,
सब याद आ गए,
पर वो नहीं आई,

एक टीस सी उठी दिल में,
शायद न मिल पाने का दर्द,
अब मन कुछ कहे,
और दिल कहे कुछ और,
इसी उधेडबुन में फँसे रहे,
की तारे देने लगे दिखाई,
पर वो नहीं आई। 

2 comments :

  1. thanks to you, you are the inspiration behind this creation

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