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Wednesday, 25 May 2016

अँधेरा

होता न अँधेरा कल अगर, फिर रोशनी की क्या पहचान थी,
जाना हमने उनको आज, कल तक जो हमसे अनजान थी,
वो अँधेरा ही तो था, जिसने हमें रोशनी का मतलब समझाया है,
अँधेरे का तो साथ है पुराना, उजियारे को तो अभी अभी अपनाया है,

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