main menu

Drop Down MenusCSS Drop Down MenuPure CSS Dropdown Menu

Wednesday, 25 May 2016

बहुत याद आते हो

बीत गए कितने ही मौसम,बीत गए वो अल्हड़पन के दिन,
सोचा न था, कैसे जी पायेंगे हम तुम्हारे बिन,
प्यार से जुड़ी हर बात अब तो बेमानी लगती है,
तुझसे जुड़ी हर याद अब तो अनजानी लगती है,
टूट चूका हूँ, बदल सा गया हूँ, ऐसा मैं पहले ना था,
पर ..... तुम अब भी बहुत याद आते हो,

वो छोटी छोटी बातों पे हमारा झगड़ना,
कभी एक दूजे से रूठकर मुंह फुलाकर बैठना,
कभी तेरी हंसी उड़ाई तो,
मेरे बाहों पे हलके हलके मुक्के बरसाना,
अब तो वो यादें भी धूमिल हो चुकी है,
पर .... तुम अब भी बहुत याद आते हो,

एक दूजे को देखते ही, ख़ुशी से हमारे चेहरे का चमकना,
मौका मिलते ही, एक दूजे के बाहों में खो जाना,
कभी जोरो की भूख लगी हो, और गोद में सर रखने का मौका मिला,
तो बिन खाए ही, मीठी सी नींद में खो जाना,
वो बातें, अब तो बस कहानी सी लगती है,

रातो को जब भी आँखें बंद करूँ, तो तेरा ही चेहरा नजर आता था,
सुबह को जब आँखें खोलू तो तेरा ही चेहरा देखने का मन करता था,
अब तो नींद भी हमसे दगा कर रही है, खुली आँखों में रातें गुजर रही है,
जिन आँखों में पूरी रात खो जाती थी, उनमे अब सबेरा का एहसास तक नहीं,
पर ... तुम अब भी बहुत याद आते हो,

खुश हूँ बहुत मैं अब तो, अपनी छोटी सी दुनिया में,
खुश होगी तुम भी कहीं, इसी छोटी से दुनिया में,
तुम हो ना पाई मेरी, मैं ना हो सका तेरा,
ये एहसास अब किसी कोने में दफन हो चूका है,
पर ... तुम अब भी बहुत याद आते हो।।

No comments :

Post a Comment