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Wednesday, 25 May 2016

वो कल

चल वापस वहीँ, जहा सुनहरे पल छोड़ आये थे,
जहाँ हमने सुन्दर भविष्य के सपने सजाये थे,

वो चिढ़ाना , वो भागना, वो प्यार से मनाना,
वो बाहों में बाहें और सडकों का किनारा,
वो घंटो तक बातें और दूर तक जाना,
वो कल था, मधुर था, प्यारा था, जीवन हमारा,

वो सर्दी की शामें और चोरी छिपे मिलना,
वो बारिश का मौसम और बचने को भागना,
वो पानी से सराबोर हवा का तन को छूना,
वो सर्द से काँपना और एक दूजे से लिपटना,

वो गलियाँ, वो सीढ़ियाँ , वो नदिया किनारा,
वो पेड़, वो छाँव, वो तने का सहारा,
वो हंसी, वो ख़ुशी, वो आँखों का इशारा,
चल लौट चले उस पल में, जो पल था हमारा।  

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