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Wednesday, 25 May 2016

जिन्दा हूँ कहीं !!

कहीं दूर, बहुत दूर,
अंजानी राहो में भटकते हुए,
तुम बहुत याद आये,
तुम बहुत याद आये।



कहीं दूर, बहुत दूर,
अँधेरे के आँचल में,
सन्नाटे के बीच,
जाने पहचाने चेहरों से दूर,
ठुकराये हुए, हालात से मजबूर,
अब रोया  भी न जाए,
अब रोया  भी न जाए।



दोष किसका था,
अब याद नहीं,
बस याद है तो इतना,
तुम अब साथ नहीं,
एक दिल था कहीं अंदर,
अब सैकड़ों हैं पर,
टूटे दिल का हर टुकड़ा,
अब भी धड़कता है,
सदा यही कहता है,
तुम बिन जिया न जाए,
तुम बिन जिया न जाए।



बहती हवाओं की सरसराहट,
बारिश की हर एक बूँद,
तेरी छुअन का एहसास,
पास ना होने का ख्याल,
हमें हर पल सताए,
हमें हर पल सताए।



सूनी रातों के बाहों में सिमटे,
तेरी यादों के साये,
कभी जी भर हंसाएं,
तो कभी हृदय से रुलाये,
मुस्काता चेहरा, प्यारी बातें,
वो झगड़ें, वो दुलार,
तड़पाये मुझे दिन-रात,
अरज है अब इतनी भगवन से,
हमें जल्दी पास बुलाये,
हमें जल्दी पास बुलाये। 

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