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Wednesday, 25 May 2016

अपने

नदियाँ बहती जाती कल कल, दरिया उनकी मंजिल है,
साथ न छोड़े मंजिल तक जो, वो नदियाँ की साहिल है,
एक-दूजे के प्यार में पड़के, भूल ना जाना अपनों को,
वे अपने ही हैं जिन्होंने, बनाया तुम्हे इस काबिल है।  

3 comments :

  1. I read your poems,Its really very nice.....

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  2. thank you so much Subhashree :)

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  3. thank you so much Subhashree :)

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