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Friday, 20 January 2017

वेदना

खुशनुमा हुआ करती थी,
अब जिंदगी खामोश है,
एक से दूजा डर रहा,
हर आदमी बदहोश है,
भाव है डरे हुए,
हर भावना भयभीत है,
ए खुदा तू है कहाँ,
कैसी ये तेरी प्रीत है,
दायरा गर टुटा,
सब कुछ बहा ले जाएगा,
कमजोरी को ताकत बना,
तूफ़ान भी थम जाएगा,
मूरत बन रुको नहीं,
सच हो, तुम वीर हो,
एक आवाज भी अधिक है,
तुम जान हो, शरीर हो,
छटपटाती, ब्यथित, व्याकुल,
इंसान के मन में रोष है,
खुशनुमा हुआ करती थी,
अब जिंदगी खामोश है।

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